Thursday, May 23, 2019

बीजेपी के नवजोत सिंह सिद्धू ने इस सीट पर

2014 में इस लोकसभा सीट पर बीजेपी के गोपाल शेट्टी ने कांग्रेस के संजय ब्रजकिशोरलाल निरूपम को हरा कर जीत हासिल की थी. यह सीट 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999 में भी बीजेपी के खाते में गई थी. जबकि 2004 कांग्रेस के टिकट पर गोविंदा यहां से जीते थे तो 2009 में कांग्रेस के संजय निरुपम. इस बार के लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्‍तर लोकसभा सीट सबसे चर्चित सीटों में से एक रही है क्योंकि कांग्रेस ने यहां से बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को उम्‍मीदवार बनाया है.
फ़िल्म से राजनीति का सफ़र तय करने वाले सुनील दत्त की वजह से यह सीट मशहूर रही है. सुनील दत्त यहां से 18 साल सांसद रहे. 1967 से 1977 तक ये सीट कांग्रेस के पास रही और उसके बाद जानेमाने वकील राम जेठमलानी पहले जनता पार्टी बाद में बीजेपी के सांसद बने. फिर 1984 से 1996 तक कांग्रेस के सांसद और फिल्म अभिनेता सुनील दत्त का दौर रहा. 2005 में सुनील दत्त की मौत के बाद हुए उपचुनाव में उनकी बेटी प्रिया दत्त सांसद चुनी गई थीं. 2009 में भी ये सीट कांग्रेस के पास रही लेकिन फिर 2014 में शिवसेना के गजानन कीर्तिकर ने इस सीट को जीत लिया. इस चुनाव में यहां शिवसेना और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. शिवसेना ने मौजूदा सांसद गजानन कीर्तिकर को टिकट दिया, वहीं कांग्रेस की ओर से कभी शिवसेना में रहे पूर्व पत्रकार संजय निरुपम मैदान में हैं.
मुंबई दक्षिण
यह वो ही सीट है जिससे 1967 में जार्ज फर्नांडिस पहली बार सांसद बने थे. 2014 में शिवसेना के अरविंद गनपत सावंत ने कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा को हराया था. इस बार शिवसेना ने एक बार फिर अरविंद सावंत पर अपना दांव लगाया तो कांग्रेस ने भी मिलिंद देवड़ा को ही उतारा है. वहीं बीएसपी की ओर से मिस्त्रीलाल गौतम मैदान में हैं.
इस सीट पर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह चुनाव लड़ रहे हैं. शाह पहली बार चुनावी मैदान में हैं. उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस ने स्थानीय विधायक सी जे चावड़ा को अपना प्रत्याशी बनाया है. 2014 के आम चुनाव में बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने यहां से जीत हासिल की थी. परंपरागत रूप से यह लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है और 1989 से ही इस पर बीजेपी का कब्जा रहा है. 2014 में लाल कृष्ण आडवाणी ने इस सीट पर 4 लाख 80 हज़ार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. क्या अमित शाह जीत के अंतर को और बड़ा करेंगे, इसे लेकर इस सीट पर सबकी नज़र बनी हुई है.
इस सीट से बीजेपी की ओर से राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह, कांग्रेस की ओर से प्रमोद शर्मा और बीएसपी के बद्री लाल चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी के इस गढ़ में बीते आठ चुनावों में कांग्रेस को जीत नसीब नहीं हुई है. दुष्यंत इस सीट पर 2004 से लगातार चुनकर संसद पहुंचते रहे हैं. 1989 में इसी सीट से दुष्यंत की मां वसुंधरा राजे ने जीत दर्ज की थी.
जोधपुर
राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत यहां से कांग्रेसी प्रत्याशी हैं. वो पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुक़ाबला बीजेपी के वर्तमान सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत से है. जोधपुर लोकसभा सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें फलौदी, लोहावत, शेरगढ़, सरदारपुरा, जोधपुर, सूरसागर, लूनी और पोखरण आती हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरदारपुरा विधानसभा सीट से ही विधायक हैं.
इस लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पहली बार चुनाव मैदान में हैं. 2014 में इस सीट पर कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी के अरुण जेटली को हरा कर जीत हासिल की थी. 2017 में अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां से कांग्रेस के ही गुरजीत सिंह औजला जीते. औजला एक बार फिर मैदान में हैं. हालांकि 2004, 2007 के उपचुनाव और 2009 के आम चुनाव में बीजेपी के नवजोत सिंह सिद्धू ने इस सीट पर कब्‍जा किया था.
हवेलियों का शहर बीकानेर राजस्थान के उत्तर पश्चिमी इलाके का बड़ा शहर है. यहां से दो मौसेरे भाई चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी अर्जुनराम मेघवाल और कांग्रेस के मदनगोपाल मेघवाल आपस में मौसेरे भाई हैं. मदनगोपाल पहली बार चुनावी मैदान में हैं वहीं अर्जुनराम मेघवाल वर्तमान सांसद. 2004 से लगातार यह सीट बीजेपी के हाथों में रही है. 1998 में कांग्रेस के बलराम जाखड़ यहां से सांसद रहे जबकि 2004 में फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र. 2009 में यह सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हो गई. तब से अर्जुनराम मेघवाल ही यहां से जीत रहे हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी ने कांग्रेस के करण चंद सिंह बाबा को ढाई लाख से अधिक वोटों से हराया था. तीसरे नंबर पर रहे थे बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार लायक अहमद. लेकिन इस बार बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद कोश्यारी का टिकट काटकर अजय भट्ट पर भरोसा जताया है. वहीं कांग्रेस की तरफ से उत्तराखंड के कद्दावर नेताओं में शुमार पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनाव मैदान में हैं.
2014 के चुनाव में इस सीट से पूर्व मुख्यमत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक बीजेपी के सांसद बने थे. 2014 में निशंक ने हरिद्वार के सांसद और केन्द्र में मंत्री रहे हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत को पौने दो लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. बीजेपी ने एक बार फिर निशंक पर भरोसा जताया है जबकि कांग्रेस ने अंबरीश कुमार को मैदान में उतारा है. 1977 में इस लोकसभा सीट का गठन हुआ और इसे अनुसूचित जाति के आरक्षित कर दिया गया. यह उन सीटों में से है जहां पहली बार सम्पन्न हुए चुनाव में ही कोई गैर कांग्रेसी सांसद बन गया था. जब 1977 में हरिद्वार में पहला चुनाव हुआ तो भारतीय लोक दल के भगवान दास ने यहां से जीत हासिल की थी. हरिद्वार लोकसभा सीट हरिद्वार की सभी 11 और देहरादून के 3 विधानसभाओें को मिलाकर बनी है. इनमें से अधिकतक पर बीजेपी के विधायक काबिज हैं. लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले 14 विधानसभाओं में से 11 पर बीजेपी जबकि 3 पर कांग्रेस के विधायक हैं.

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